बिलासपुर/बिल्हा। बिलासपुर जिले के बिल्हा क्षेत्र में मीडिया द्वारा किए गए स्टिंग ऑपरेशन में कथित रूप से किराना एवं मनिहारी दुकानों से खुलेआम शराब बेचे जाने का मामला सामने आया है। स्टिंग के दौरान एक से अधिक स्थानों पर बिना अधिकृत शराब दुकान के शराब उपलब्ध होने के कथित तथ्य सामने आने के बाद आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

राज्य सरकार प्रत्येक वर्ष आबकारी विभाग के माध्यम से शराब बिक्री से करोड़ों रुपये का राजस्व अर्जित करती है और इसके लिए अधिकृत दुकानों का संचालन किया जाता है। ऐसे में यदि सामान्य किराना और मनिहारी दुकानों तक शराब पहुंच रही है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि विभागीय निगरानी आखिर कहां कमजोर पड़ रही है।मीडिया द्वारा किए गए स्टिंग ऑपरेशन में कथित रूप से ऐसे कई स्थान चिन्हित किए गए, जहां बिना वैध अनुमति शराब बेची जा रही थी। यदि जांच में इन तथ्यों की पुष्टि होती है, तो यह मामला केवल अवैध शराब बिक्री तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संबंधित विभागों की जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करेगा।मीडिया का दावा है कि पूर्व में भी इस प्रकार की गतिविधियों की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दी गई थी, लेकिन कई मामलों में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। यदि बार-बार शिकायतों और सूचनाओं के बावजूद अवैध बिक्री जारी रहती है, तो इससे कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।बिल्हा क्षेत्र में यह कोई पहला मामला नहीं बताया जा रहा है। समय-समय पर अवैध शराब बिक्री की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन इसके बावजूद कथित रूप से यह कारोबार जारी है।

इससे यह आशंका भी व्यक्त की जा रही है कि अवैध कारोबारियों में कानून
का भय कम होता जा रहा है।इस मामले में आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है। यह भी आवश्यक है कि यह पता लगाया जाए कि क्या नियमित निरीक्षण किए जा रहे थे, शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई और यदि कहीं विभागीय लापरवाही या कर्तव्य निर्वहन में कमी रही है, तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है।यह मामला केवल अवैध शराब बिक्री का नहीं, बल्कि सरकारी राजस्व, कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही से भी जुड़ा हुआ है। यदि खुलेआम अवैध बिक्री हो रही है, तो इससे सरकार को राजस्व की संभावित हानि होने के साथ-साथ अवैध गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है।अब निगाहें जिला प्रशासन, वरिष्ठ आबकारी अधिकारियों और पुलिस प्रशासन पर हैं कि मीडिया के स्टिंग ऑपरेशन में सामने आए तथ्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाती है या नहीं। यदि जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की लापरवाही अथवा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि कानून के प्रति जनता का विश्वास बना रहे।(नोट: यह रिपोर्ट मीडिया द्वारा किए गए स्टिंग ऑपरेशन और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। इसमें उल्लिखित आरोपों एवं तथ्यों का अंतिम सत्यापन सक्षम प्राधिकारी की जांच और विधिक प्रक्रिया के अधीन है। संबंधित विभाग या अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)
